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मां की ममता

                
                                                         
                            बड़ा ही खास सफर था, एक मां का वो।
                                                                 
                            
एक नहीं ,दो नहीं, पूरे नो महीन का था वो।
हर पल एक आस लिए था वो।
एक नए मेहमान की प्यास लिए था वो।

आखिर वो इंतजार की घड़ी आई थी।
एक नई दुनिया खुलने वाली थी।
लेकिन उस मां की कठिन परीक्षा बाकी थी।
खुशियों से पहले ,ये परीक्षा भारी थी।
दर्द की आग मै जल कर, उसको परीक्षा देनी थी।

पसीना माथे छलक रहा , बस कुछ देर की बेहोशी थी।
जब गूंजी कमरे में बच्चे की, प्यारी सी किलकारी थी।
दर्द भूल गई वो मां ,जब पकड़ी उसकी नन्हीं कलाई थी।
निहारती रही उसको, वो उसके सपने कि परछाई थी।

उसके आने से आंगन में, नई बहारें आई थी।
उसकी मासूम नटखट अदाओं पर,वो मां वारी जाती थी।
जब उंगली मां की,उसकी मुठ्ठी में कस के बंधी होती थी।
सारे कायनात की खुशियां, उस मां को अपने कदमों मै लगती थी।
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8 महीने पहले

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