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चार पत्तियां जश्न ए आज़ादी पर

                
                                                         
                            देश है चांद उसका नूर हैं हम
                                                                 
                            
अपनी आज़ादी पे मसरूर हैं हम
नाम पर उसके दिल धड़कता है
यूं तो हिंदुस्तान से दूर हैं हम
-परवेज़ मुज़फ़फ़र
 
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एक वर्ष पहले

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