सखी री चलो बाबा अमरनाथ की नगरी
जिस की रहमतों से झोली सबकी है भरती
श्रद्धा और प्रेम की मिलन स्थली है यह तो
अलग अनुभूति अलग एहसास लिए है यह तो
बाबा अमरनाथ की छवि देखो कितनी प्यारी है
सुंदर श्वेत बर्फ से निर्मित इसकी तो शान निराली है
सजी है सुंदर दुर्गम राहें वारिद छम छम बरसते हैं
कभी वर्षा की बूंदे तन मन को शीतल करती हैं
भक्त प्यारे शिव का गुणगान करते हैं
जयकारे लगाते हैं और नाच करते हैं
देखो चहुं ओर हजारों सुस्वादु व्यंजनों की महक
फिज़ा को है महकाती
यह है नगरी प्यारे बाबा शिव की
दुर्गम राहों की थकान मिटाती है
ओम नमो शिवाय से घाटी को गुंजाते हैं
बैरागी शंभू के दर्शन बर्फ से निर्मित रूप में पाते हैं
हजारों फीट ऊंचे सिंहासन पर मेरे शिव विराजे है
सुंदर बर्फ से सजे शिव अमरेश्वर भी कहलाते हैं
हिंदू मुस्लिम एकता की प्रतीक यात्रा निराली है
चलो बाबा की नगरी इसकी शान निराली है
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