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एक सभ्य नागरिक की पहचान है।

                
                                                         
                            स्त्री केवल एक देह नहीं,
                                                                 
                            
एक पूरा संसार है,
किसी की बेटी,किसी की बहन,
किसी की माँ ही नहीं,
वह स्वयं भी एक पहचान है।

उससे बात करते हुए,
अपने शब्दों को जरा संभाल लेना,
क्योंकि तुम्हारी बदतमीज़ी,
उसकी सहनशीलता की परीक्षा नहीं।

वह चुप है तो कमज़ोर नहीं,
वह सहती है तो मजबूर नहीं,
और जिस दिन अपने सम्मान के लिए,
आवाज़ उठती है,
उसे दबाना आसान नहीं।

तुम्हारे कुछ गलत शब्द,
उसकी गरिमा को कम नहीं कर सकते,
क्योंकि किसी स्त्री का सम्मान,
किसी पुरुष के व्यवहार पर निर्भर नहीं करता।

स्त्री तुम्हारे मनोरंजन की वस्तु नहीं,
तुम्हारी टिप्पणी का विषय नहीं,
वह भी उतनी ही जीवंत और मनुष्य है,
जितने तुम।

इसलिए स्त्री से बात करो,
तो शब्दों में थोड़ी मर्यादा रखना,
क्योंकि स्त्री को सम्मान देना,
कोई एहसान नहीं,
एक सभ्य नागरिक की पहचान है।
~रुस्तगी
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3 घंटे पहले

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