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तुझे खोने के डर में

                
                                                         
                            तुझे खोने के डर में ख़ुद को ही हमने गँवाया है
                                                                 
                            
तेरी खातिर ये दिल अपना बहुत हमने दुखाया है

मोहब्बत जुर्म बन जाएगी क्या मालूम था हमको
मगर ये दर्द अपना दिल में दफ़ना कर छुपाया है

लहू के आँसू रात-ओ-दिन बहाए तेरी ही खातिर
मोहब्बत का ही शायद कर्ज़ कुछ ऐसे चुकाया है

बहुत कोशिश की पर दिल से भुला पाए नहीं तुमको
तेरी यादों ने आ हर वक़्त ही हमको रुलाया है

लिखा था दर्द किस्मत में जो यूँ मिलना हुआ तुझसे
फ़लक पर भी बिठा कर ख़ाक़ में तू ने गिराया है
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एक घंटा पहले

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