आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सफ़ल शागिर्द हो तो, उनको इत्मीनान होता है

                
                                                         
                            ख़ुदा से ऊँचा शिक्षक का सदा  स्थान होता है
                                                                 
                            
चलें हम उनके नक़्श-ए-पा पे तो सम्मान होता है

शरण में जिसकी चेले को मिला है ज्ञान का सागर
हमारी नज़रों में शिक्षक भी तो भगवान होता है

ज़हालत का अंधेरा इल्म से अपने, मिटाते हैं
तभी शिक्षक की मेहनत से वो विद्यावान होता है

भुला सकता नहीं कोई कभी इमदाद शिक्षक की
वो शिक्षक अपने उस शागिर्द का इक मान होता है

मिलें शिक्षक हमें ऐसे जो भर दें ज्ञान का सागर
सभी शागिर्दों का बस इक यही अरमान होता है

हमें क़ाबिल बनाया उन्हीं की मेहनत ने है 'पारुल'
सफ़ल शागिर्द हो तो, उनको इत्मीनान होता है
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
28 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर