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ख़ुद पे विश्वास हो तो सफ़र तेरा शादाब हो सकता है

                
                                                         
                            हौसला दिल में हो तो कोई भी ज़फ़र-याब हो सकता है
                                                                 
                            
ज़िंदगी में मुकम्मल भी आँखों का हर ख़्वाब हो सकता है

काँटो पर चलने का गर हुनर आ गया जो किसी को यहाँ
उसकी राहों में फिर कामयाबी का भी बाब हो सकता है

मुस्तक़िल सा जुनूँ दिल में मक़सद को हासिल ही करना हो गर
टिमटिमाते दिए में भी सूरज सा इक ताब हो सकता है

लाख संघर्ष ही क्यूँ नहीं आएँ मंज़िल की राहों में भी
हारते वो नहीं हौसला जिनका नायाब हो सकता है

हौसला मन में रख आगे ही बढ़ना 'पारुल' है तुमको भी अब
ख़ुद पे विश्वास हो तो सफ़र तेरा शादाब हो सकता है
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एक घंटा पहले

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