चुप रहकर भी गुज़रती रहीं,
कुछ हदें थीं,
जो धीरे-धीरे पार होती रहीं।
फिर एक दिन,
जब निशान दिखाई देने लगे,
तो पुराने जवाबों को
नए सवाल मिलने लगे।
-अपराजितापरम
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