अमर अस्मिता आर्यावर्त की,
हकीकत अपने पुरुषार्थ की
अब तो हम तुझे दिखलायेंगे।
सौगंध अबकी मां भारती की
तुम्हारा अस्तित्व मिटा आयेंगे
रे निर्लज्ज सबक लिया नहीं
कईयों बार धुल चटा आए हैं
हमने थल दिया जल दिया
तुने पाक को म्लान किया
शपथ इस बार भारत मां की
तुझे भूगोल से मिटा आयेंगे।
सोए शेर को जगा कर तुमने
जीवन की कर दी बड़ी भूल
गोली चला जो कुकर्म किया
देशवासी को है नहीं कबूल
हम कभी न इसे भूल पायेंगे,
आतंकी की तो बात ही छोड़
इस बार लाहौर लेकर आएंगे।
© प्रकाश प्रियांशु
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