फूल,खुशबू,कली तू है
नाजुकी में पली तू है
एक मुकम्मल ग़ज़ल तुझमें
मेरी कलम से भली तू है !
हुस्न तेरा कुछ बहका-सा
एहसास,अहा ! कुछ महका-सा
हवाओं-सी हँसी तेरी
दुआओं-सी खुशी तेरी
दरख्तों-सा तेरा होना
ख्यालों-सा तेरा खोना
दीवानगी में ढली तू है
मेरे इश्क की गली तू है !
- पप्पू मिश्र 'पुष्प'
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