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अब तुम ही बताओ भला हम क्या करे

                
                                                         
                            हमने तो तुम्हें चाहा पूरी शिद्दत से
                                                                 
                            
गर तुम न चाह पाए तो ये तुम्हारी बदकिस्मती
पर चाहने से पहले हमने भी तो नहीं पूछा तुमसे
फिर कैसी नाराजगी??
माना चाहत एकतरफा हुई
पर हमारी चाहत भी तो कम न हुई
कैसे समझाए इस नादां दिल को
एक बार जिसपर आ गया बस आ गया
अब या तो इंतजार रहेगा
या गुजार देंगे उम्र सारी तुम्हारी चाहत में
हमने तो तुम्हें चाहा पूरी शिद्दत से
अब तुम ही बताओ हम भला क्या करे ??
स्वरचित -सरिता सिंह
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 दिन पहले

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