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मैं जानता हूँ तुम कैसे इंसाफ करोगे...

                
                                                         
                            हिफाज़त बेटियों की आबरू की,
                                                                 
                            
तुम क्या खाक करोगे,
मैं जानता हूँ, तुम कैसे इंसाफ करोगे।
दोगे सजा, बेशक कुछ को,
मगर लख्ते ज़िगरों को तुम माफ करोगे,
मैं जानता हूँ, तुम कैसे इंसाफ करोगे।
सियासत मजहब है तुम्हारा,
कैसे अखलाक करोगे?
मैं जानता हूँ, तुम कैसे इंसाफ करोगे।
लूटी आबरू जिसने हुकूमत के सायों में,
कौम के उन दरिंदों को,
धक्के दे देकर दरबारों से,
तुम क्या साफ करोगे?
मैं जानता हूँ, तुम कैसे इंसाफ करोगे।
तुम अपनी इज्ज़त की खातिर,
लगाकर बंदिशें तमाम,
जब बेटियों की ख्वाहिशों को खाक करोगे,
तो तुम ही बताओ, तुम कैसे इंसाफ करोगे?
तो तुम ही बताओ, तुम कैसे इंसाफ करोगे?


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6 वर्ष पहले

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