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मैं अपनी धुन में चलता रहता

                
                                                         
                            मैं अपनी धुन में चलता रहता, हाथ पकड़ के मेरा,
                                                                 
                            
हौले से अगर आपने चौंकाया ना होता।

वो चेहरा जिसे लोग चाँद कहते हैं, मेरा होता,
अगर आपने आईना दिखाया ना होता।

ये चिराग कुछ देर और जलता,
हाथ अपना अगर आपने हटाया ना होता।

मुसाफिर ही रहते उम्र भर पंकज,
वक़्त पे अगर घर बनाया ना होता।
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एक घंटा पहले

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