रिश्ते बचाते बचाते,
मैने गलतियों को,
नजर अंदाज कर दिया।
बस अंदेशा इस बात का था,
कि मेरी वजह से,
किसी को कोई नुकसान न पहुँचे,
पर मेरे स्वयं के काम में उन्होंने,
मुझे ही आईना दिखा दिया।
छोड़ दिया मैने उन रिश्तों को,
जिन्होंने कटु भाषा का प्रयोग किया।
-चंद्र दत्त शर्मा
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