निःसंकोच दूरी बना लेना,
जो तुम्हारे स्वाभिमान को ठेस पहुंचाते हों।
रोक लेना उन भावों को,
जो राह में तुम्हारे रोड़ा अटकाते हों।
-चंद्र दत्त शर्मा
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