क्या करोगे साथ चलकर ?
किसने किसका साथ दिया है ?
यह भी सोच लो...!
चार दिन की चांदनी है,
अपने और पराए,
सब के सब झूठे रिश्ते हैं।
पहले तो सब अपने होते हैं,
वक्त गुजरा...,
और सब किनारे करने लगे,
सब भूल जाते हैं,
कि किसने क्या किया है ?
-चंद्र दत्त शर्मा
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