जिस ओर भी नजर दौड़ाई,
मतलब भी निकला हरजाई।
जहां देखी सर्व संपन्न कमाई,
रहकर वहीं पूरी रात गँवाई।
जहां गए वहां प्यास बुझाई,
भाइयो यह भी नहीं है स्थाई।
पूरी जिंदगी दाव पर लगाई,
इसमें समझते अपनी बड़ाई।
जैसे तैसे कर हिम्मत जगाई,
बस अब देर हो चुकी भाई।
-चंद्र दत्त शर्मा
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