जब अदावत का जोर हो,
तो मेल मिलाप बिगड़ने लगते हैं।
बढ़ जाती हैं इतनी दूरियां,
फिर पास आने को तड़पने लगते हैं।
जब याद आती हैं हर बातें,
सोच सोच चेहरे मुरझाने लगते हैं।
जिंदगी निकल जाती है बस यूं ही,
अंत में फिर पछताने लगते हैं।
-चंद्र दत्त शर्मा
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