बिना इच्छा के...,
सब कुछ बुरा लगता है,
यदि कोई कुछ कहे कहे,
तो वो भी बुरा लगता है।
यदि एकांत में बैठ जाएं,
तो कुछ देर बाद...,
सब कुछ अच्छा लगता है।
यह तो मन मस्तिष्क की बात है,
कब बुरा और कब अच्छा लगता है?
-चंद्र दत्त शर्मा
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