लोग कहते हैं...!
सब दिन ना होते एक समान।
मैने इन दिनों को करीब से देखा है,
जब मैं टूट रहा था,
कोई काम नहीं बन रहा था।
किसी ने कहा -
अरे... आपको कुछ पता नहीं है !
आप क्या जानो ?
अपनों को झाँका, रिश्तों को झाँका,
किसी ने सहारा नहीं दिया।
बुरा वक्त निकला, अच्छे दिन आए,
मैने इस वक्त को करीब से महसूस किया है।
परख हुई सबकी, और पता चला कि...,
अपने ही अपने नहीं होते।
-चंद्र दत्त शर्मा
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