आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अब तक देख लिया भला करके

                
                                                         
                            अब तक देख लिया भला करके,
                                                                 
                            
बुराई के सिवा भलाई भी नहीं मिली।
भला करते करते भी,
कुछ ना कुछ तो कमी रह ही जाती है,
उसको ढाल बनाकर,
मन माफिक खरी खोटी सुनने को मिली।
क्या फायदा हुआ ?
हम तो चले थे सहयोग करने,
एक दूसरे के बगैर काम भी नहीं चलता,
इस भावना से लग गए,
बस अब बहुत हो चुका,
अपना काम से काम फिर भी बदनाम,
ये तो किसी के काम ही नहीं आते,
फिर यह बात सुनने को मिली।
-चंद्र दत्त शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
23 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर