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राम और लोकतंत्र की पताका

                
                                                         
                            जीवन का सच है मृत्यु ,शाश्वत है
                                                                 
                            
ऐसे ही राम नाम सत्य है शाश्वत है
राम कथा समाज की, जीवन की प्रथा है।
ऋषियोंऔ तपस्वियों के बीच रह कर
शिखर के साथ रहकर
राम ने ऊंचाइयों को पाया नहीं
ऊंचाइयों को जीया
गंगा पार का श्रेय केवट को
लंका विजय का विभीषण को दिया ।
शबरी - अहिल्या के साथ लोकतंत्र जीवंत था
रामेश्वर की स्थापना के लिए रावण भी उपस्थित था
सभी को ऊंचाइयां दी
विश्व को राम दरबार दिया
सरल कीया कठीन को ,असंभव को संभव कीया ।
लक्ष्य लंका विजय नही
जनतंत्र , लोकतंत्र को आगे बढ़ाना था
लोकतंत्र की पताका लहराता
श्रीराम दल सदा सर्वदा अजेय था |
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3 वर्ष पहले

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