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रब पिया

                
                                                         
                            मैंने तुझसे कभी घर का पता पूछा नहीं
                                                                 
                            
दुंगी कभी आवाज ,पलटकर ,कभी सोचा नहीं ।
कशिश दिल की फिज़ाओं में कैसे घुल गई
आईना लगा कर कभी देखा नहीं।
रब ने भी कुछ तय किया होगा
आंखों में अश्रुओं को सिंचा होगा
याद नही कब सुखे आंसू मैंने कभी पोछा नहीं ।।
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3 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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