प्रेम वीणा ह्रदय मे
स्पंदन करती है जब जब
पंख मन मयुर के
गिरते हैं तब तब
आप स्वीकार कर इन्हें
शीष मुकूट में सजाते रहे
प्रेम सदा हमारा तुमसे अजब
प्रेम सदा तुम्हारा हमसे गजब।
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