शेष पर धरती आज भी कायम है
शेष पर उम्मीदें आज भी कायम है
निसर्ग में जलवायु की लकीर आज भी क़ायम है
सीता के सत की परीक्षा कल भी थी आज भी है
सियासत में पेच आज भी कायम है ।।
देव और दानव का समुद्र मंथन आज भी कायम है
अमृत कलश से छलकेगा विष या अमृत
अंदेशा आज भी कायम है
शंकर का हलाहल पीना अभी शेष है
सत असत का संघर्ष कायम है
नारी ओर अग्नि कुंड का पटाक्षेप कब होगा
प्रश्न चिन्ह अभी क़ायम है ।।
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