आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

प्रश्न कायम है

                
                                                         
                            शेष पर धरती आज भी कायम है
                                                                 
                            
शेष पर उम्मीदें आज भी कायम है
निसर्ग में जलवायु की लकीर आज भी क़ायम है
सीता के सत की परीक्षा कल भी थी आज भी है
सियासत में पेच आज भी कायम है ।।

देव और दानव का समुद्र मंथन आज भी कायम है
अमृत कलश से छलकेगा विष या अमृत
अंदेशा आज भी कायम है
शंकर का हलाहल पीना अभी शेष है
सत असत का संघर्ष कायम है
नारी ओर अग्नि कुंड का पटाक्षेप कब होगा
प्रश्न चिन्ह अभी क़ायम है ।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर