कृष्ण तुम इतना बताना,
बांवरी राधा ही क्युं है
महारास मे बजाकर पैंजनीया
राधावर लगते हो न्यारे
बांवरे लगते हो प्यारे।।
कृष्ण तुम इतना बताना।।
धुन हां बंसी की सुनाना चीत्त सब का मोह लेना
प्रेम की व्याकुलता में ,फिर अकेला छोड़ देना
कृष्ण अब तुम ही बताओ
यह तुम्हारी है ठीटोली या तुम्हारा बांकपन है
निहारती अपलक निगाहें , मन ही मन करती प्रशन है
।। कृष्ण तुम इतना बताना।।
मौन बरसाने की कलीयां, सुनी सी गोकुल की गलियां
आज भी कान्हा तेरे पदचाप सुनने को तरसती
ग़ोपीयां मन की दिवानी, रंग गई थी एक रंग मे
सांझ कान्हा भोर कान्हा,भोर कान्हा सांझ कान्हा
कर्म करती भुल जाती, याद रहता एक कान्हा
गर छेड़ दें बातें तुम्हारी, अश्रु धन लेकर बरसती।।
।। कृष्ण तुम इतना बताना।।
तान बंसी की सुनाकर तुमने ही न्योता दिया था
महारास में तुमने निभाया एक प्रण था,
राधे से एकाकार होने का वो क्षण था
आधी राधा कृष्ण आधा , कृष्ण आधा आधी राधा
प्रण हां एकाकार का भी श्याम तुमने ही कीया था
भुलकर राधे से वादा, क्युं पार्थ को गीता सुनाई
भुलकर वह रास प्रांगण , क्युं शंख रणभेरी बजाई
।। कृष्ण तुम इतना बताना।।
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