घूँघट में चाँद
चाँद में दाग़ देखोगे क्या फायदा?
चाँदनी का ये झरना रुकेगा नही
सज गई टिमटिमाती, सभी सूक्तियां
द्वार देहरी को प्यारे सजा है दीया
आ भी जाओ क्या सूरज ढलेगा नहीं ।।
कर लो कितने ही जपतप आराधना
चाहिए एक विश्वास की बूंद बस
जो पा जाओ विश्वास की बूंद तुम
मत रुको चल पड़ो ,विश्वास की हर डगर
शिव से पीव का मिलन रूकेगा नहीं ।।
मान जाओ के बैठो ,उठाओ पलक
पलकों का नयन द्वार , क्या खुलेगा नहीं
लौ को मध्यम करो , हटालो घूँघट जरा
मिलेंगे, यह आकाश और यह धरा
मिलन चाँद का चाँदनी से रुकेगा नहीं।।
ले चलो - स्वर सभी, अनहद के अनंत में
स्वरलहरियों से गूंजे, अंतरिक्ष की हर दिशा
नृत्य करें बिजलियां,अनहद के सामने
मधुर तरंगों का बहना रूकेगा नहीं
मिलन, परम का संत से सनेही से होगा यहीं।।
-ओम बजाज
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