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गीत और बंदगी

                
                                                         
                            सजदा कबुल कर लो
                                                                 
                            
बंदगी हां कबुल कर लो
उलझनो के बगैर ।।
करूं मैं सिजदा हो नेमत तेरी
हां हो नेमत तेरी २
तुझसे हो जाय बस एक नजर
उलझनो के बगैर//
इस वजु पे हो तेरा करम
हां हो तेरा करम २
सारे मिट जाय मन के भरम
उलझनो के बगैर//
हो दीदार बस एक लम्हा
हां बस एक लम्हा २
इन ,सांसों की , डोर छोड़ दो
उलझनो के बगैर//
छा गई प्यारी मदहोशीयां
हां प्यारी मदहोशीयां २
प्रीत ने प्रीत को जी लिया
उलझनो के बगैर//
चाह है शब्द मिलते रहे
हां शब्द मिलते रहे २
चाह है गीत ढलते रहे
उलझनो के बगैर//
गीत पर हां मेरे साथ दो
हां मेरे साथ दो २
तालीयों से हां जज़्बात दो
उलझनो के बगैर//
मीत मन का मुझे मिल गया
हां मुझे मिल गया २
हर डगर रोशनी का दिया 
उलझनो के बगैर//
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3 वर्ष पहले

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