सभी है प्रबुद्ध
प्रबुद्धों में युद्ध,
प्रयास हो अविरत अनिरुद्ध
मिट जाये क्रुद्ध,
अगन की तपन झेल रहे विश्व का
समय बने शुद्ध, समय बने बुद्ध।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X