भाषा मृदु होती है
उत्तर से आती लहरें , समाती दक्षिण सागर मे
संध्या के अर्पण तर्पण मे
वर्षा की एक बुंद, सीप मे
बन जाती मोती है ||भाषा ||
नदियों की कलकल ध्वनि,
बाणी में मिश्री सी घुल जाती है ||भाषा ||
हवा विहंगम , बाज़े छमछम,
इक मीठी धुन बन जाती है ||भाषा ||
साहस भर देती है भाषा
भाषा अति बेजोड़ , शीष्ट होती है ||भाषा ||
पल पल न्यारे नए कलेवर - शब्दो मे झांकते तेवर,
मस्तक पर बरसाती मेहर
झुम रहे शब्दों के जेवर, मात्राएं घुघरू पिरोती है ||भाषा ||
जननी है , मत शोषण करना
पोषण करना , तन से मन से, ह्रदयस्थल से ||भाषा||
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