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वो आया नहीं

                
                                                         
                            चार दिन बीते, आठ दिन बीते, पूरा साल बीत गया, मगर वो आया नहीं — वो आया नहीं।
                                                                 
                            
वो खेत, वो गलियाँ, वो आम का पेड़, वो खेल का मैदान सब राह देखते रह गए, मगर वो आया नहीं।
जहाँ बचपन बीता, वो उसे ही भूल गया। आज पूरे चार साल हो गए, मगर वो आया नहीं।
____________________________________ओम_____. اوم
वो अपने बचपन के घर से निकला,
आँखों में उम्मीद और होंठों पर एक वादा लिए —
“मैं लौटूँगा।”
लेकिन वक़्त उसे बहुत दूर ले गया और ज़िंदगी ने वहीं रोक लिया।
अब वो पुराना घर ख़ामोश खड़ा है,
गलियाँ धूल में सोई हैं,
खेल का मैदान उसकी हँसी भूल चुका है,
और आम का पेड़ अब भी उन क़दमों का इंतज़ार कर रहा है,
जो कभी लौटकर नहीं आए।
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6 महीने पहले

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