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मेरी माँ की पुरानी साड़ी

                
                                                         
                            मेरी माँ की पुरानी साड़ी
                                                                 
                            

मेरी माँ की पुरानी साड़ी,
लगती है मुझको प्यारी,
बताती है मुझको हर पल,
अपनी ये कहानी सारी।

मेरी माँ की पुरानी साड़ी।

लिपटती हूँ जब भी इससे,
सुनाती है मुझे लोरी,
दिखाती है मुझे बचपन,
के पल वो न्यारी-न्यारी।

मेरी माँ की पुरानी साड़ी।

सहेज रखी हूँ इसे दिल से,
छुपाकर सबसे सारी,
दिलाती है मुझे दिलासा,
जब भी मन हो भारी।

मेरी माँ की पुरानी साड़ी।

दिखाती थी मुझे नखरे,
दिलाती थी नए कपड़े,
कहती थी उनसे जब भी,
ले लो तुम भी नई साड़ी।

मेरी माँ की पुरानी साड़ी,
लगती है मुझको प्यारी।
— नूतन झा
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3 hours ago

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