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तुम यूं काजल लगा कर न आया करो

                
                                                         
                            तुम काजल लगाकर आती हो,
                                                                 
                            
थोड़ा तो हम पर रहम किया करो।
हम तो मासूम हैं, जो तुम्हें निहारते हैं,दिनभर,
पर तुम भी यूँ न हमें देखा करो।

यूँ आते-जाते मुस्कुराना तेरा,
और फिर उस पर दिल हार जाना मेरा।
थोड़ा तो यार, हम पर रहम करो,
तुम यूँ न हमें देखा करो।

पढ़ने आते हैं, मगर पढ़ नहीं पाते हैं,
तेरे ख़यालों में ही खो जाते हैं।
चेहरे पर यूँ अलक न बिखराया करो,
तुम यूँ न हमें देखकर मुस्कुराया करो।

तेरी सादगी के दीवाने बने बैठे हैं,
अपने ही दिल को समझाने बैठे हैं।
खुद से कहते हैं, नोहित, यूँ न तड़पा करो,
उसकी हर अदा पर यूँ न मरा करो।

मेरी मोहब्बत को नकार देना हक़ है तुम्हारा,
मगर एक इल्तजा करने का हक़ तो है हमारा।
तुम काजल लगाकर यूँ न आया करो,
एक नज़र देखकर यूँ न हमें तड़पाया करो।

तुम यूं काजल लगा कर न आया करो,,,,,
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4 घंटे पहले

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