आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मेरे दिल के कितने क़रीब हैं आप।

                
                                                         
                            मेरे दिल के कितने क़रीब हैं आप।
                                                                 
                            
कभी शरवरी, तो कभी शबनम लगती हैं आप,
दिलनशीं और दिलफ़रेब हैं आप।
लफ़्ज़ों में कैसे बताऊँ कि
मेरे दिल के कितने क़रीब हैं आप।

शादाब-सा चेहरा, गुलों-सा निखार हैं आप।”
सोंधी-सी ख़ुशबू बनकर रूह में उतरती हैं आप।”
लफ़्ज़ों में कैसे बयाँ करूँ
मेरे दिल के कितने क़रीब हैं आप।
चाँद की चाँदनी,
परिंदों का नग़मा हैं आप।
अल्फ़ाज़ों से परे,
हुस्न की एक मिसाल हैं आप।”
लफ़्ज़ों में कैसे बयाँ करूँ,
मेरे दिल के कितने क़रीब हैं आप।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर