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पर मैं क्यूँ डरूं जब सृष्टि का छलिया मेरे साथ हो

                
                                                         
                            मेरा सुकून तुम हो
                                                                 
                            
मेरे जीवन का आधार तुम हो
क्यूँ कहूँ मैं किसी और से कुछ
जब मेरे मन का हाल समझने वाले तुम हो
क्यूँ पूछूं मैं किसी और से सवाल
जब मेरे प्रश्नों का उत्तर देने वाले और उन्हें हल करने वाले तुम हो
क्यूँ मांगू किसी और को मैं तुझसे
जब सबकुछ स्वयं तुम हो
लाख छल करले भले दुनिया मेरे साथ
पर मैं क्यूँ डरूं जब सृष्टि का छलिया मेरे साथ हो
- नीति नागोरे
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2 घंटे पहले

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