नित नया सवेरा होता है,
नित चाँद कुमुदिनी खोता है।
नित किस स्मृति में रोता है,
नित क्यों सपनों में सोता है?
नित नया सवेरा होता है।
नयन अश्रु से भारित कर,
व्यथा को अति मार्मिक कर,
प्रियतम को अति आत्मिक कर,
तुम व्यर्थ प्रलाप करते हो!
जो छूट गया वह अपना न था,
जो टूट गया वह सपना ही था।
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