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मां दर्पण है मेरा

                
                                                         
                            माँ तो जीवन दात्री है, माँं एक विश्वास है।
                                                                 
                            
माँं एक मजबूत स्तंभ है, माँं एक साहस है।।
माँं जीवन की आधारशिला है, माँं प्यारी है।
माँं जीवन का आदर्श है, माँं भोली है।।

तन मन का घाव भी भर जाय।
ऐसा माँं का जादुई - सा स्पर्श है।।
दुःख बड़ा हो, या फिर छोटा।
माँं के आगे है, बस खोटा।।

दिल माँं का निश्चल, निष्कपट, पावन।
ममता भरा, स्नेहमयी, निर्मल, दामन।।
माँं सुख में हँसती, दुख भी सहती।
पर हर विपत्ति से हमें बचाती।।

माँं की हर डांट में प्यार भरा है।
माँं का आशीर्वाद बनता कवच हमारा।।
माँं साया बन देती हरदम साथ हमारा।
माँं दर्पण है मेरा, मैं उसकी परछाई।।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।

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5 वर्ष पहले

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