"माँ ईश्वर की सबसे खूबसूरत कृति हुआ करती है।
माँ की ममता की छाँव में ही तो जन्नत हुआ करती है।।
संतान की खुशियों की माँ ईश्वर से दुआ किया करती है।
पर संतान के लिए तो माँ स्वयं ईश्वर हुआ करती है।।
साकार रूप में तो ईश्वर कहीं नज़र नहीं आया करते हैं।
शायद माँ के रूप में ईश्वर ही अवतरित हुआ करते हैं।।"
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