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चिंता मत कर

                
                                                         
                            चिंता मत कर
                                                                 
                            

चिंता से न कुछ पाएगा,
चिंता मत कर,
कुछ कर,
एक दिन सब संवर जाएगा….

चिंता मौत का आशियाना है,
वहीं पर ठहर जाएगा,
कुछ कर,
एक दिन संवर जाएगा….

चिंता मौत का द्वार है,
बंद न कर पाएगा,
कुछ कर,
एक दिन सब संवर जाएगा….

चिंता जीते जी मौत हैं,
मौत से पहले मत मर,
कुछ कर,
एक दिन सब संवर जाएगा….


चिंता चिता की आग है,
जलकर खाक हो जाएगा,
कुछ कर,
एक दिन सब संवर जाएगा….

जीवन है जीने के लिए,
चिंता में न गंवा देना,
कुछ कर,
एक दिन सब संवर जाएगा….

जीना क्यों औरों के लिए
अपने लिए जरा जी ले,
कुछ कर,
एक दिन सब संवर जाएगा….

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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5 वर्ष पहले

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