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हाॅं मैं स्वाभिमानी हूॅं

                
                                                         
                            हां मैं स्वाभिमानी हूं
                                                                 
                            

हां मैं स्वाभिमानी हूं।
रोने के लिए किसी के
कंधे का सहारा नहीं
खुद को सम्हालने के लिए
अकेली ही काफी हूं।
तवज्जो नहीं देती मैं
गिरगिट जैसे लोगों को
जो आगे कुछ और
पीछे कुछ और होते हैं।
तारीफों के पुल में बंध
जाऊं,इतनी स्वार्थी नहीं।
ज़ख्मों को नासूर बनाना
सीखा है,उन पर मलहम
लगाऊं उतनी कमजोर नहीं।
हां मैं स्वाभिमानी हूं
रोने के लिए कंधे का
सहारा नहीं, खुद को
सम्हालने के लिए
अकेली ही काफी हूं।
मेरे श्रृंगार पर मुझे
कोमल मत समझना
काली की बेटी
महाकाली हूं।
शौक़ मेरे देख मुझे
नाजुक मत समझना।
वक्त आने पर कटारों
से ही नहीं बरछी तलवार
और ढालों से भी खेलती
हूं ,हमारे घूंघट कमजोरी
नहीं, संस्कार है हमारे,
स्वतंत्र सबल बदलती
दुनिया की मजबूत
नारी हूं, हां मैं
स्वाभिमानी हूं।
-निर्मला सिन्हा निशा
 
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11 महीने पहले

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