कभी अपनी मन की बातें उसे कह दूं क्या
है कितना वो मक्कार उसे कह दूं क्या।
चाहतें वफा वाली उसमें बात ना थी
हैं वो कितना फरेबी उसे कह दूं क्या।
चलों छोड़ो जाने भी दो उसे उसकी राह,
खुद सम्हल गए हम उसे कह दूं क्या।
वो खेलता रहा हमारे जज्बातों से
हम निभा गए उसे कह दूं क्या।
वो तो पालतू था आस्तीन का सांप निकला
परायों को पनाह दिया उसे कह दूं क्या।
- निर्मला सिन्हा निशा
छत्तीसगढ़
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