कैसे स्वीकार कर लूं।
ये हार-जीत की होर होर
गठबंधन में जोड़ें एक ही
डोर -डोर।
सत्य को छिपा नाचता
ये झूठ का शोर -शोर।
उलझनों में उलझे मन
का पोर-पोर।
कभी ठंडा कभी गरम
होता दिमाग का जोर-जोर।
झूठे वादे सुन नाचे दिल
का मोर-मोर।
कैसे स्वीकार कर लूं
ये हार-जीत की होर-होर।
-निर्मला सिन्हा निशा
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