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ज़िन्दगी हर पल उदास सी लगती है

                
                                                         
                            ज़िन्दगी हर पल उदास सी लगती है
                                                                 
                            
की ज़िन्दगी हर पल उदास सी लगती है

की कोई ना हो संग , ऐसी तरस्ती प्यास सी लगती है

की तनहाईया अक्सर अकेले मे गुंटर गुं कर जाती है
ना रहा अब कोई एहसास दिला जाती है

की खफा है दुनिया मुझसे ,सब जगह घना अंधेरा लगता है
की बादल के पीछे छूपा सूरज भी ,घन घोर अमावश्या लगता है

की खुशियां बेरूठ है मुझसे , की खुशियां बेरूठ है मुझसे
आईन धुंधला लगता हैं
की हर रात के बाद का ऊजाला
सूनसान सड़क सा दिखाई देता है

ना चेहकने का मन करता है अब ना खिलखिलाने का
ना चेहकने का मन करता है ना खिलखिलाने का अब
आने वाला हर दिन पतझड सा लगता है

ऊमीद है कि लौट आये वो अब
ऊमीद है की लौट आये वो अब
की दिल अब बस और नहीं धड़काता है
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

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