फिर कहीं से कहीं गया होगा,
मन है फिर से भटक गया होगा।
जिसने जोता था उम्र भर बंजर,
जब मरा भूख से मरा होगा।
आइना झूठ बोलकर खुश था,
पर उसे दिल से दुख हुआ होगा।
सोचो ऊंचे मकान की लड़ियों,
कैसे जुगनू को दिन मिला होगा।
लुटती अस्मत पे द्रोपदी बोली,
बस मेरा श्याम आ रहा होगा।
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