बलिदान दिया था वीरों ने
जब भारत के ही खातिर था,
अपना सब परिवार त्याग कर
वीर गति को प्राप्त किया,
यूं कायरता को मारा जब
तुम चढ़ गए थे फांसी पर,
हसते-हंसते विदा किया था
भारत की माताओं ने।
न भूले हैं उस जख्म को,
जो तुमने हमें दिलवाए थे,
जेल भेजकर फांसी देकर
खुद को महान बताए थे।
आजाद देश को करने का
जब जोश जगा था सबमें,
खूब लड़े वह तन-मन से
और मार भगाया सबने,
स्वतंत्र हुआ जब देश हमारा
चैन की सांस ले पाए थे।
बलिदान दिये हुए वीरों को हम
सत - सत नमन कर पाये हैं |
- निकिता तिवारी
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