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झूठी दुनिया

                
                                                                                 
                            झूठी दुनिया सच का ज्ञान देती है,
                                                                                                

जिनका कोई ईमान नहीं,
उनको सम्मान देती है,
गरीबों से गुलामी,
अमीर को सलामी देती है,
झूठी दुनिया सच का ज्ञान देती है,
देख देख के थक गया हूं,
करूं क्या ये सोचता हूं,
आंख मूंद लूं, या बदल के रख दूं,
पांव खींच लूं, या मसल के रख दूं,
पुछ लूं सबसे के, क्यों ये ज्ञान देती है,
भ्रष्टाचारियों को ये , क्यों सम्मान देती है


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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1 year ago

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