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न जाने कहाँ बिछड़ गया।

                
                                                         
                            आँखों में नमी
                                                                 
                            
पेट पर हाथ,
भटकता रहा
दो रोटी की आस।
नज़रें नीची, पत्तों से खेलता
देखा एक सुनहरा मंज़र,
कर रहा था अपनी
माँ का इंतज़ार।
आँखों में चमक, होठों पर मुस्कान
देखते ही माँ को, लिपट गया,
दो निवाला माँ के हाथ का
प्यार में सिमट गया।
देख इस दृश्य को
मेरे अश्क टपक गए,
प्यार भरा आँचल माँ का
न जाने कहाँ बिछड़ गया।
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2 घंटे पहले

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