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भोले! अब बतलाओ, मन चैन से कैसे सोय?

                
                                                         
                            पढ़त-लिखत किशोरी, धीरे-धीरे जवान होय,
                                                                 
                            
कली-सी कोमल सूरत उसकी, कमल-सी सुंदर होय।

अम्बर की छत तले, संग किसी के एक दिन होय,
जग के छल-प्रपंच देख, मन उसका व्याकुल होय।

लालच भरे ज़माने में, अचरज कैसा होय,
भोले के जोड़त हाथ, मन में प्रश्न अनेक होय।

एक से अनेक रात बीतें, नयनन में नींद न होय,
भोले! अब बतलाओ, मन चैन से कैसे सोय? 
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35 minutes ago

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