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कविता : पचपन किलो....

                
                                                         
                            कविता : पचपन किलो....
                                                                 
                            
मुझ को.... नंबर से
मेरे पास फोन आया
एक लड़की ने तुम से
शादी करना है बताया

मैं बोला, न जान न
कोई पहचान
तुम ने तो मुझे
कर दिया हैरान

लड़की बोली, तुम को
मैं जानती हूं
भीतर ही भीतर तुम्हें बहुत
ही मानती हूं

अब तुम्हारा
क्या ख्याल है ?
मेरा तो यही
एक सवाल है

मैं बोला, तुम पाकिस्तान की हो
या हिंदुस्तान की हो ?
पहले ये बताओ तुम किस
खानदान की हो ?

पसंद आई तो शादी
भी कर लेंगे
एक दूसरे के गले में माला
भी धर लेंगे

इस से पहले तुम
घर का पता दो
तुम्हारे बारे में
सब कुछ बता दो

लड़की बोली, मेरा
घर यहीं है
देखिए ज्यादा
दूर नहीं है

मां बाप की एक
अकेली छोरी हूं
थोड़ी सी सावली न
काली न गोरी हूं

मेरा परिवार
थोड़ा गरीब है
मेरी लम्बाई पांच
फुट करीब है

मेरा लुक सुपर
डूपर है
जात भी मेरी सब
से ऊपर है

मैं बोला, तुम ठीक ही होगी
अगर सब कुछ इतना है
मगर ये तो बताओ अभी
तुम्हारा वजन कितना है ?

लड़की बोली, हम तो खानदानी हैं
हमारे घर में भरपूर हंसी है
वजन... पापा का सौ मम्मी का
नब्बे मेरा तो सिर्फ असी है

मैं बोला, अभी इतना वजन है शादी के
बाद तो सौ किलो हो जाएगी
बिस्तर से उस बखत तो तू
यार उठ भी नहीं पाएगी

अगर शादी करनी है मुझ से
काफी वजन घटाओ
असी किलो ग्राम वजन से
पचपन किलो हो जाओ

शादी करूंगा
तुम से तभी
फिलहाल तो कुछ
न होगा अभी
फिलहाल तो कुछ
न होगा अभी.......

 
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3 घंटे पहले

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