वो बारिश के दिन और ये बारिश के दिन
इन दोनों बारिशों में, अंतर बहुत है ।
बचपन की बारिश में नहाने का मजा था
अब बड़े हो चुके हैं अपने पैरों पर खड़े हो चुके हैं ।
दफ्तर की खिड़की से बारिश को बस निहारते हैं।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X